साखियाँ

साखियाँ गुरु साहिबान और बहादुर सिखों के जीवन की छोटी-छोटी कहानियाँ हैं। हर एक में एक सीख है जिसे हम रोज़ अपना सकते हैं।

वैसाखी 1699 — पंज प्यारे

4 में से भाग 1

1699 की वैसाखी पर हज़ारों सिख आनंदपुर साहिब में इकट्ठा हुए। गुरु गोबिंद सिंह जी उनके सामने खड़े हुए और पूछा, “कौन अपने धर्म के लिए अपना शीश देने को तैयार है?”

सच्चा सौदा ज़रूरतमंदों के साथ बाँटना गुरु नानक देव जी भाई लालो और मलिक भागो ईमानदारी की कमाई गुरु नानक देव जी पंजा साहिब गुस्से के सामने शांत रहना गुरु नानक देव जी हरिद्वार में पश्चिम की ओर पानी अपने कामों के बारे में सोचना गुरु नानक देव जी लंगर में बादशाह सब बराबर हैं गुरु अमर दास जी साईं मियाँ मीर और हरिमंदिर साहिब सभी धर्मों का आदर गुरु अर्जन देव जी बंदी छोड़ — 52 राजाओं की रिहाई दूसरों को आज़ाद करने में मदद करना गुरु हरगोबिंद साहिब जी टूटा हुआ फूल प्रकृति के साथ कोमल रहना गुरु हर राय जी दिल्ली में बाल गुरु बीमारों की सेवा गुरु हरकृष्ण जी वैसाखी 1699 — पंज प्यारे साहस और श्रद्धा गुरु गोबिंद सिंह जी भाई कन्हैया जी सबमें ईश्वर को देखना गुरु गोबिंद सिंह जी माई भागो जी और चाली मुक्ते कभी हार न मानना बहादुर सिख

साखियाँ सैकड़ों सालों से सुनाई और दोहराई जाती रही हैं, इसलिए छोटी-छोटी बातें एक सुनाने वाले से दूसरे तक थोड़ी अलग हो सकती हैं।