बहादुर और दयालु नायक
सिख इतिहास ऐसे लोगों से भरा है जो बहादुर, दयालु और न्यायप्रिय थे। यहाँ उनमें से कुछ के बारे में पढ़िए।
भाई कन्हैया
1700 का दशक
लड़ाइयों के दौरान वे सभी घायल सैनिकों को पानी पिलाते थे — दुश्मन सैनिकों को भी! जब दूसरों ने शिकायत की, तो गुरु गोबिंद सिंह जी ने उनकी तारीफ़ की और उन्हें मरहम भी दिया ताकि वे घायलों की और मदद कर सकें। उन्हें अक्सर रेड क्रॉस का अग्रदूत कहा जाता है।
माई भागो
1705
एक बहादुर महिला, जो चालीस सिख सैनिकों को वापस लड़ाई में ले गईं, ताकि मुक्तसर में गुरु गोबिंद सिंह जी की रक्षा कर सकें। बाद में वे गुरु जी की अंगरक्षक बनीं।
बंदा सिंह बहादुर
1670–1716
एक महान नेता, जिन्होंने पंजाब में पहला सिख राज कायम किया। उन्होंने ज़मीन उन गरीब किसानों को दी जो उस पर मेहनत करते थे।
बाबा दीप सिंह
1682–1757
एक विद्वान, जिन्होंने अपने हाथ से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की प्रतियाँ लिखीं। 75 साल की उम्र में वे श्री दरबार साहिब की रक्षा के लिए लड़े, और कहानी कहती है कि भयानक घाव के बाद भी वे अपना सिर हथेली पर रखकर लड़ते रहे।
हरि सिंह नलवा
1791–1837
महाराजा रणजीत सिंह के सबसे बहादुर सेनापति, जो ख़ैबर दर्रे की रक्षा के लिए मशहूर हैं।
सारागढ़ी के 21 वीर
1897
हवलदार ईशर सिंह की अगुवाई में 21 सिख सैनिकों ने लगभग 10,000 हमलावरों से एक छोटी चौकी की रक्षा की। वे आख़िरी सैनिक तक लड़ते रहे।
विश्व युद्धों में सिख सैनिक
1914–1945
भारत की आबादी का बहुत छोटा हिस्सा होने के बावजूद सिख पूरी दुनिया में बहादुरी से लड़े। दोनों विश्व युद्धों में 83,000 से ज़्यादा पगड़ीधारी सैनिकों ने अपने प्राण दिए।
राजकुमारी सोफ़िया दलीप सिंह
1876–1948
महाराजा रणजीत सिंह की पोती, जिन्होंने ब्रिटेन में महिलाओं को वोट का हक़ दिलाने के लिए संघर्ष किया।
✅ झटपट जाँच
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1. किसने लड़ाई में दोनों तरफ़ के घायल सैनिकों को पानी पिलाया?
2. 1897 में सारागढ़ी की रक्षा कितने सिख सैनिकों ने की?