आज का हुकमनामा

हर सुबह श्री दरबार साहिब (श्री हरमंदिर साहिब), अमृतसर में हुकमनामा — दिन के लिए गुरु का हुक्म — लिया जाता है। यह रहा, अर्थ सहित।

एक नज़र में

हर सुबहश्री दरबार साहिब में नया हुकमनामा लिया जाता है
हुक्मदिन के लिए गुरु का हुक्म या मार्गदर्शन
रहाउ“ठहराव” वाली पंक्ति: शबद का मूल भाव
3 भाषाएँहिंदी, पंजाबी और अंग्रेज़ी में अर्थ

श्री दरबार साहिब (श्री हरमंदिर साहिब), अमृतसर

17 अक्टूबर 2026

अंग 725 · Raag Tilang · Guru Raam Daas Ji
अर्थ:

ਤਿਲੰਗ ਮਹਲਾ ੪ ॥

तिलंग महला ४ ॥

tila(n)g mahalaa chauthhaa ||

तिलंग महला ४ ॥

ਹਰਿ ਕੀਆ ਕਥਾ ਕਹਾਣੀਆ ਗੁਰਿ ਮੀਤਿ ਸੁਣਾਈਆ ॥

हरि कीआ कथा कहाणीआ गुरि मीति सुणाईआ ॥

har keeaa kathaa kahaaneeaa gur meet sunaieeaa ||

हे गुरसिख ! मित्र गुरू ने (मुझे) परमात्मा की सिफत सालाह की बातें सुनाई हैं।

ਬਲਿਹਾਰੀ ਗੁਰ ਆਪਣੇ ਗੁਰ ਕਉ ਬਲਿ ਜਾਈਆ ॥੧॥

बलिहारी गुर आपणे गुर कउ बलि जाईआ ॥१॥

balihaaree gur aapane gur kau bal jaieeaa ||1||

मैं अपने गुरू से बार-बार सदके कुर्बान जाता हूँ। 1।

ਆਇ ਮਿਲੁ ਗੁਰਸਿਖ ਆਇ ਮਿਲੁ ਤੂ ਮੇਰੇ ਗੁਰੂ ਕੇ ਪਿਆਰੇ ॥ ਰਹਾਉ ॥

आइ मिलु गुरसिख आइ मिलु तू मेरे गुरू के पिआरे ॥ रहाउ ॥

aai mil gursikh aai mil too mere guroo ke piaare || rahaau ||

हे मेरे गुरू के प्यारे सिख ! मुझे आ के मिल।मुझे आ के मिल।रहाउ।

ਹਰਿ ਕੇ ਗੁਣ ਹਰਿ ਭਾਵਦੇ ਸੇ ਗੁਰੂ ਤੇ ਪਾਏ ॥

हरि के गुण हरि भावदे से गुरू ते पाए ॥

har ke gun har bhaavadhe se guroo te paae ||

हे गुरसिख ! परमात्मा के गुण (गाने) परमात्मा को पसंद आते हैं।मैंने वह गुण (गाने) गुरू से सीखे हैं।

ਜਿਨ ਗੁਰ ਕਾ ਭਾਣਾ ਮੰਨਿਆ ਤਿਨ ਘੁਮਿ ਘੁਮਿ ਜਾਏ ॥੨॥

जिन गुर का भाणा मंनिआ तिन घुमि घुमि जाए ॥२॥

jin gur kaa bhaanaa ma(n)niaa tin ghum ghum jaae ||2||

मैं उन (भाग्यशालियों से) बार-बार कुर्बान जाता हूँ।जिन्होंने गुरू के हुकम को (मीठा समझ के) माना है। 2।

ਜਿਨ ਸਤਿਗੁਰੁ ਪਿਆਰਾ ਦੇਖਿਆ ਤਿਨ ਕਉ ਹਉ ਵਾਰੀ ॥

जिन सतिगुरु पिआरा देखिआ तिन कउ हउ वारी ॥

jin satigur piaaraa dhekhiaa tin kau hau vaaree ||

हे गुरसिख ! मैं उनके सदके जाता हूँ।जिन प्यारों ने गुरू का दर्शन किया है।

ਜਿਨ ਗੁਰ ਕੀ ਕੀਤੀ ਚਾਕਰੀ ਤਿਨ ਸਦ ਬਲਿਹਾਰੀ ॥੩॥

जिन गुर की कीती चाकरी तिन सद बलिहारी ॥३॥

jin gur kee keetee chaakaree tin sadh balihaaree ||3||

जिन्होंने गुरू की (बताई) सेवा की है उन पर सदा बलिहारी जाता हूँ । 3।

ਹਰਿ ਹਰਿ ਤੇਰਾ ਨਾਮੁ ਹੈ ਦੁਖ ਮੇਟਣਹਾਰਾ ॥

हरि हरि तेरा नामु है दुख मेटणहारा ॥

har har teraa naam hai dhukh meTanahaaraa ||

हे हरी ! तेरा नाम सारे दुख दूर करने के समर्थ है।

ਗੁਰ ਸੇਵਾ ਤੇ ਪਾਈਐ ਗੁਰਮੁਖਿ ਨਿਸਤਾਰਾ ॥੪॥

गुर सेवा ते पाईऐ गुरमुखि निसतारा ॥४॥

gur sevaa te paieeaai gurmukh nisataaraa ||4||

(पर यह नाम) गुरू की शरण पड़ने से ही मिलता है।गुरू के सन्मुख रहने से ही (संसार-समुंद्र से) पार लांघा जा सकता है। 4।

ਜੋ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਧਿਆਇਦੇ ਤੇ ਜਨ ਪਰਵਾਨਾ ॥

जो हरि नामु धिआइदे ते जन परवाना ॥

jo har naam dhiaaidhe te jan paravaanaa ||

हे गुरसिख ! जो मनुष्य परमात्मा का नाम सिमरते हैं।वे मनुष्य (परमात्मा की हजूरी में) कबूल हो जाते हैं।

ਤਿਨ ਵਿਟਹੁ ਨਾਨਕੁ ਵਾਰਿਆ ਸਦਾ ਸਦਾ ਕੁਰਬਾਨਾ ॥੫॥

तिन विटहु नानकु वारिआ सदा सदा कुरबाना ॥५॥

tin viTahu naanak vaariaa sadhaa sadhaa kurabaanaa ||5||

नानक उन मनुष्यों से कुर्बान जाता है।सदा सदके जाता है। 5।

ਸਾ ਹਰਿ ਤੇਰੀ ਉਸਤਤਿ ਹੈ ਜੋ ਹਰਿ ਪ੍ਰਭ ਭਾਵੈ ॥

सा हरि तेरी उसतति है जो हरि प्रभ भावै ॥

saa har teree usatat hai jo har prabh bhaavai ||

हे हरी ! हे प्रभू ! वही सिफत सालाह तेरी सिफत सालाह कही जा सकती है जो तुझे पसंद आ जाती है।

ਜੋ ਗੁਰਮੁਖਿ ਪਿਆਰਾ ਸੇਵਦੇ ਤਿਨ ਹਰਿ ਫਲੁ ਪਾਵੈ ॥੬॥

जो गुरमुखि पिआरा सेवदे तिन हरि फलु पावै ॥६॥

jo gurmukh piaaraa sevadhe tin har fal paavai ||6||

(हे भाई !) जो मनुष्य गुरू के सन्मुख हो के प्यारे प्रभू की सेवा-भक्ति करते हैं।उनको प्रभू (सुख-) फल देता है। 6।

ਜਿਨਾ ਹਰਿ ਸੇਤੀ ਪਿਰਹੜੀ ਤਿਨਾ ਜੀਅ ਪ੍ਰਭ ਨਾਲੇ ॥

जिना हरि सेती पिरहड़ी तिना जीअ प्रभ नाले ॥

jinaa har setee pirahaRee tinaa jeea prabh naale ||

हे भाई ! जिन लोगों का परमात्मा से प्यार पड़ जाता है।उनके दिल (सदा) प्रभू (के चरणों के) साथ ही (जुड़े रहते) हैं।

ਓਇ ਜਪਿ ਜਪਿ ਪਿਆਰਾ ਜੀਵਦੇ ਹਰਿ ਨਾਮੁ ਸਮਾਲੇ ॥੭॥

ओइ जपि जपि पिआरा जीवदे हरि नामु समाले ॥७॥

oi jap jap piaaraa jeevadhe har naam samaale ||7||

वह मनुष्य प्यारे प्रभू को सिमर-सिमर के।प्रभू का नाम हृदय में संभाल के आत्मिक जीवन हासिल करते हैं। 7।

ਜਿਨ ਗੁਰਮੁਖਿ ਪਿਆਰਾ ਸੇਵਿਆ ਤਿਨ ਕਉ ਘੁਮਿ ਜਾਇਆ ॥

जिन गुरमुखि पिआरा सेविआ तिन कउ घुमि जाइआ ॥

jin gurmukh piaaraa seviaa tin kau ghum jaiaa ||

हे भाई ! मैं उन मनुष्यों से सदके जाता हूँ।जिन्होंने गुरू की शरण पड़ कर प्यारे प्रभू की सेवा भक्ति की है।

ਓਇ ਆਪਿ ਛੁਟੇ ਪਰਵਾਰ ਸਿਉ ਸਭੁ ਜਗਤੁ ਛਡਾਇਆ ॥੮॥

ओइ आपि छुटे परवार सिउ सभु जगतु छडाइआ ॥८॥

oi aap chhuTe paravaar siau sabh jagat chhaddaiaa ||8||

वह मनुष्य स्वयं (अपने) परिवार समेत (संसार-समुंद्र के विकारों से) बच गए।उन्होंने सारा संसार भी बचा लिया है। 8।

ਗੁਰਿ ਪਿਆਰੈ ਹਰਿ ਸੇਵਿਆ ਗੁਰੁ ਧੰਨੁ ਗੁਰੁ ਧੰਨੋ ॥

गुरि पिआरै हरि सेविआ गुरु धंनु गुरु धंनो ॥

gur piaarai har seviaa gur dha(n)n gur dha(n)no ||

हे भाई ! गुरू सराहनीय है।गुरू सराहना के योग्य है।प्यारे गुरू के द्वारा (ही) मैंने परमात्मा की सेवा-भक्ति आरम्भ की है।

ਗੁਰਿ ਹਰਿ ਮਾਰਗੁ ਦਸਿਆ ਗੁਰ ਪੁੰਨੁ ਵਡ ਪੁੰਨੋ ॥੯॥

गुरि हरि मारगु दसिआ गुर पुँनु वड पुँनो ॥९॥

gur har maarag dhasiaa gur pu(n)n vadd pu(n)no ||9||

मुझे गुरू ने (ही) परमात्मा (के मिलाप) का रास्ता बताया है।गुरू का (मेरे पर ये) उपकार है।बड़ा उपकार है। 9।

ਜੋ ਗੁਰਸਿਖ ਗੁਰੁ ਸੇਵਦੇ ਸੇ ਪੁੰਨ ਪਰਾਣੀ ॥

जो गुरसिख गुरु सेवदे से पुँन पराणी ॥

jo gursikh gur sevadhe se pu(n)n paraanee ||

हे भाई ! गुरू के जो सिख गुरू की (बताई) सेवा करते हैं।वे भाग्यशाली हो गए हैं।

ਜਨੁ ਨਾਨਕੁ ਤਿਨ ਕਉ ਵਾਰਿਆ ਸਦਾ ਸਦਾ ਕੁਰਬਾਣੀ ॥੧੦॥

जनु नानकु तिन कउ वारिआ सदा सदा कुरबाणी ॥१०॥

jan naanak tin kau vaariaa sadhaa sadhaa kurabaanee ||10||

दास नानक उनसे सदके जाता है।सदा ही कुर्बान जाता है। 10।

ਗੁਰਮੁਖਿ ਸਖੀ ਸਹੇਲੀਆ ਸੇ ਆਪਿ ਹਰਿ ਭਾਈਆ ॥

गुरमुखि सखी सहेलीआ से आपि हरि भाईआ ॥

gurmukh sakhee saheleeaa se aap har bhaieeaa ||

हे भाई ! गुरू की शरण पड़ कर (परस्पर प्रेम से रहने वाली सत्संगी) सहेलियाँ (ऐसी हो जाती हैं कि) वह अपने आप प्रभू को प्यारी लगने लगती हैं।

ਹਰਿ ਦਰਗਹ ਪੈਨਾਈਆ ਹਰਿ ਆਪਿ ਗਲਿ ਲਾਈਆ ॥੧੧॥

हरि दरगह पैनाईआ हरि आपि गलि लाईआ ॥११॥

har dharageh painaieeaa har aap gal laieeaa ||11||

परमात्मा की हजूरी में उन्हें आदर मिलता है।परमात्मा ने उन्हें स्वयं अपने गले से (सदा के लिए) लगा लिया है। 11।

ਜੋ ਗੁਰਮੁਖਿ ਨਾਮੁ ਧਿਆਇਦੇ ਤਿਨ ਦਰਸਨੁ ਦੀਜੈ ॥

जो गुरमुखि नामु धिआइदे तिन दरसनु दीजै ॥

jo gurmukh naam dhiaaidhe tin dharasan dheejai ||

हे प्रभू ! जो मनुष्य गुरू की शरण पड़ कर (तेरा) नाम सिमरते हैं।उनके दर्शन मुझे बख्श।

ਹਮ ਤਿਨ ਕੇ ਚਰਣ ਪਖਾਲਦੇ ਧੂੜਿ ਘੋਲਿ ਘੋਲਿ ਪੀਜੈ ॥੧੨॥

हम तिन के चरण पखालदे धूड़ि घोलि घोलि पीजै ॥१२॥

ham tin ke charan pakhaaladhe dhooR ghol ghol peejai ||12||

मैं उनके चरण धोता रहूँ।और।उनके चरणों की धूल घोल-घोल के पीता रहूँ। 12।

ਪਾਨ ਸੁਪਾਰੀ ਖਾਤੀਆ ਮੁਖਿ ਬੀੜੀਆ ਲਾਈਆ ॥

पान सुपारी खातीआ मुखि बीड़ीआ लाईआ ॥

paan supaaree khaateeaa mukh beeReeaa laieeaa ||

हे भाई ! जो जीव-सि्त्रयाँ पान-सुपारी आदि खाती रहती हैं।मुँह में पान चबाती रहती हैं (भाव।सदा पदार्थों के भोग में मस्त हैं)।

ਹਰਿ ਹਰਿ ਕਦੇ ਨ ਚੇਤਿਓ ਜਮਿ ਪਕੜਿ ਚਲਾਈਆ ॥੧੩॥

हरि हरि कदे न चेतिओ जमि पकड़ि चलाईआ ॥१३॥

har har kadhe na chetio jam pakaR chalaieeaa ||13||

और जिन्होंने परमात्मा का नाम कभी नहीं सिमरा।उनको मौत (के चक्कर) ने पकड़ के (सदा के लिए) आगे लगा लिया (अर्थात।वे चौरासी के चक्करों में पड़ गई)। 13।

ਜਿਨ ਹਰਿ ਨਾਮਾ ਹਰਿ ਚੇਤਿਆ ਹਿਰਦੈ ਉਰਿ ਧਾਰੇ ॥ ਤਿਨ ਜਮੁ ਨੇੜਿ ਨ ਆਵਈ ਗੁਰਸਿਖ ਗੁਰ ਪਿਆਰੇ ॥੧੪॥

जिन हरि नामा हरि चेतिआ हिरदै उरि धारे ॥ तिन जमु नेड़ि न आवई गुरसिख गुर पिआरे ॥१४॥

jin har naamaa har chetiaa hiradhai ur dhaare || tin jam neR na aaviee gursikh gur piaare ||14||

हे भाई ! जिन्होंने अपने मन में हृदय में टिका के परमात्मा का नाम सिमरा। उन गुरू के प्यारे गुरसिखों के नजदीक मौत (का डर) नहीं आता। 14।

ਹਰਿ ਕਾ ਨਾਮੁ ਨਿਧਾਨੁ ਹੈ ਕੋਈ ਗੁਰਮੁਖਿ ਜਾਣੈ ॥

हरि का नामु निधानु है कोई गुरमुखि जाणै ॥

har kaa naam nidhaan hai koiee gurmukh jaanai ||

हे भाई ! परमात्मा का नाम खजाना है।कोई विरला मनुष्य गुरू की शरण पड़ कर (नाम से) सांझ डालता है।

ਨਾਨਕ ਜਿਨ ਸਤਿਗੁਰੁ ਭੇਟਿਆ ਰੰਗਿ ਰਲੀਆ ਮਾਣੈ ॥੧੫॥

नानक जिन सतिगुरु भेटिआ रंगि रलीआ माणै ॥१५॥

naanak jin satigur bheTiaa ra(n)g raleeaa maanai ||15||

हे नानक ! (कह–) जिन मनुष्यों को गुरू मिल जाता है।वह (हरेक मनुष्य) हरी-नाम के प्रेम में जुड़ के आत्मिक आनंद का सुख लेता है। 15।

ਸਤਿਗੁਰੁ ਦਾਤਾ ਆਖੀਐ ਤੁਸਿ ਕਰੇ ਪਸਾਓ ॥

सतिगुरु दाता आखीऐ तुसि करे पसाओ ॥

satigur dhaataa aakheeaai tus kare pasaao ||

हे भाई ! गुरू को (ही नाम की दाति) देने वाला कहना चाहिए।गुरू प्रसन्न हो के (नाम देने की) कृपा करता है।

ਹਉ ਗੁਰ ਵਿਟਹੁ ਸਦ ਵਾਰਿਆ ਜਿਨਿ ਦਿਤੜਾ ਨਾਓ ॥੧੬॥

हउ गुर विटहु सद वारिआ जिनि दितड़ा नाओ ॥१६॥

hau gur viTahu sadh vaariaa jin dhitaRaa naao ||16||

मैं (तो) सदा गुरू से (ही) कुर्बान जाता हूँ।जिसने (मुझे) परमात्मा का नाम दिया है। 16।

ਸੋ ਧੰਨੁ ਗੁਰੂ ਸਾਬਾਸਿ ਹੈ ਹਰਿ ਦੇਇ ਸਨੇਹਾ ॥

सो धंनु गुरू साबासि है हरि देइ सनेहा ॥

so dha(n)n guroo saabaas hai har dhei sanehaa ||

हे भाई ! वह गुरू सराहनीय है।उस गुरू की प्रशन्सा करनी चाहिए।जो परमात्मा का नाम जपने का उपदेश देता है।

ਹਉ ਵੇਖਿ ਵੇਖਿ ਗੁਰੂ ਵਿਗਸਿਆ ਗੁਰ ਸਤਿਗੁਰ ਦੇਹਾ ॥੧੭॥

हउ वेखि वेखि गुरू विगसिआ गुर सतिगुर देहा ॥१७॥

hau vekh vekh guroo vigasiaa gur satigur dhehaa ||17||

मैं (तो) गुरू को देख-देख के गुरू का (सुंदर) शरीर देख के खिल रहा हूँ। 17।

ਗੁਰ ਰਸਨਾ ਅੰਮ੍ਰਿਤੁ ਬੋਲਦੀ ਹਰਿ ਨਾਮਿ ਸੁਹਾਵੀ ॥

गुर रसना अंमृतु बोलदी हरि नामि सुहावी ॥

gur rasanaa a(n)mrit boladhee har naam suhaavee ||

हे भाई ! गुरू की जीभ आत्मिक जीवन देने वाली हरी-नाम उचारती है।हरी-नाम (उच्चारण के कारण) सुंदर लगती है।

ਜਿਨ ਸੁਣਿ ਸਿਖਾ ਗੁਰੁ ਮੰਨਿਆ ਤਿਨਾ ਭੁਖ ਸਭ ਜਾਵੀ ॥੧੮॥

जिन सुणि सिखा गुरु मंनिआ तिना भुख सभ जावी ॥१८॥

jin sun sikhaa gur ma(n)niaa tinaa bhukh sabh jaavee ||18||

जिन सिखों ने (गुरू का उपदेश) सुन के गुरू पर यकीन किया है।उनकी (माया की) सारी भूख दूर हो गई है। 18।

ਹਰਿ ਕਾ ਮਾਰਗੁ ਆਖੀਐ ਕਹੁ ਕਿਤੁ ਬਿਧਿ ਜਾਈਐ ॥

हरि का मारगु आखीऐ कहु कितु बिधि जाईऐ ॥

har kaa maarag aakheeaai kahu kit bidh jaieeaai ||

हे भाई ! (हरी-नाम सिमरन ही) परमात्मा (के मिलाप) का रास्ता कहा जाता है।हे भाई ! बताओ।किस ढंग से (इस रास्ते पर) चला जा सकता है।

ਹਰਿ ਹਰਿ ਤੇਰਾ ਨਾਮੁ ਹੈ ਹਰਿ ਖਰਚੁ ਲੈ ਜਾਈਐ ॥੧੯॥

हरि हरि तेरा नामु है हरि खरचु लै जाईऐ ॥१९॥

har har teraa naam hai har kharach lai jaieeaai ||19||

हे प्रभू ! तेरा नाम ही (रास्ते का) खर्च है।ये खर्च ही पल्ले बाँध के (इस रास्ते पर) चलना चाहिए। 19।

ਜਿਨ ਗੁਰਮੁਖਿ ਹਰਿ ਆਰਾਧਿਆ ਸੇ ਸਾਹ ਵਡ ਦਾਣੇ ॥

जिन गुरमुखि हरि आराधिआ से साह वड दाणे ॥

jin gurmukh har aaraadhiaa se saeh vadd dhaane ||

हे भाई ! जिन मनुष्यों ने गुरू की शरण पड़ कर परमात्मा का नाम जपा है वे बड़े समझदार शाह बन गए हैं।

ਹਉ ਸਤਿਗੁਰ ਕਉ ਸਦ ਵਾਰਿਆ ਗੁਰ ਬਚਨਿ ਸਮਾਣੇ ॥੨੦॥

हउ सतिगुर कउ सद वारिआ गुर बचनि समाणे ॥२०॥

hau satigur kau sadh vaariaa gur bachan samaane ||20||

मैं सदा गुरू से कुर्बान जाता हूँ।गुरू के बचनों के द्वारा (परमात्मा के नाम में) लीन हुआ जा सकता है। 20।

ਤੂ ਠਾਕੁਰੁ ਤੂ ਸਾਹਿਬੋ ਤੂਹੈ ਮੇਰਾ ਮੀਰਾ ॥

तू ठाकुरु तू साहिबो तूहै मेरा मीरा ॥

too Thaakur too saahibo toohai meraa meeraa ||

हे प्रभू ! तू मेरा मालिक है।तू मेरा साहिब है।तू ही मेरा पातशाह है।

ਤੁਧੁ ਭਾਵੈ ਤੇਰੀ ਬੰਦਗੀ ਤੂ ਗੁਣੀ ਗਹੀਰਾ ॥੨੧॥

तुधु भावै तेरी बंदगी तू गुणी गहीरा ॥२१॥

tudh bhaavai teree ba(n)dhagee too gunee gaheeraa ||21||

अगर तू पसंद आए।तो ही तेरी भक्ति की जा सकती है।तू गुणों का खजाना है।तू गहरे जिगरे वाला है। 21।

ਆਪੇ ਹਰਿ ਇਕ ਰੰਗੁ ਹੈ ਆਪੇ ਬਹੁ ਰੰਗੀ ॥

आपे हरि इक रंगु है आपे बहु रंगी ॥

aape har ik ra(n)g hai aape bahu ra(n)gee ||

हे नानक ! (कह– हे भाई !) परमात्मा आप ही (निर्गुण स्वरूप में) एक मात्र हस्ती है।और।आप ही (सर्गुण स्वरूप में) अनेकों रूपों वाला है।

ਜੋ ਤਿਸੁ ਭਾਵੈ ਨਾਨਕਾ ਸਾਈ ਗਲ ਚੰਗੀ ॥੨੨॥੨॥

जो तिसु भावै नानका साई गल चंगी ॥२२॥२॥

jo tis bhaavai naanakaa saiee gal cha(n)gee ||22||2||

जो बात उसे अच्छी लगती है।वही बात जीवों के भले के लिए होती है। 22। 2।

हुकमनामा, लिप्यंतरण और अर्थ BaniDB से। अंग्रेज़ी अर्थ: संत सिंह खालसा। पंजाबी और हिंदी अर्थ: प्रो. साहिब सिंह। गुरबाणी ज़ोर से पढ़ते समय कृपया सिर ढकें।

❓ लोग पूछते हैं

हुकमनामा क्या होता है?

हुकमनामा (जिसे वाक या मुखवाक भी कहते हैं) गुरु ग्रंथ साहिब जी से पढ़ा गया शबद है, जिसे दिन के लिए गुरु का हुक्म या मार्गदर्शन माना जाता है।

आज का हुकमनामा श्री दरबार साहिब

इस पेज पर श्री दरबार साहिब (श्री हरमंदिर साहिब), अमृतसर से आज का हुकमनामा लिप्यंतरण और हिंदी, पंजाबी व अंग्रेज़ी अर्थ सहित दिया गया है। यह हर सुबह नया होता है।

श्री दरबार साहिब में हुकमनामा कब लिया जाता है?

यह हर दिन तड़के, गुरु ग्रंथ साहिब जी का श्री दरबार साहिब में प्रकाश होने के बाद लिया जाता है, और फिर दुनिया भर की संगत के साथ साझा किया जाता है।

हुकमनामा कैसे लिया जाता है?

गुरु ग्रंथ साहिब जी को सम्मान के साथ खोला जाता है, और बाईं ओर वाले अंग (पन्ने) के ऊपर दिया शबद पढ़ा जाता है। अगर वह शबद पिछले अंग से शुरू हुआ हो, तो पाठ उसके आरंभ से किया जाता है।

रहाउ का क्या अर्थ है?

रहाउ का अर्थ है “ठहरो”। रहाउ वाली पंक्ति में शबद का मुख्य संदेश होता है, इसलिए बहुत से लोग पहले इसी पर विचार करते हैं।

क्या मैं घर पर हुकमनामा पढ़ सकता हूँ?

हाँ। बहुत से सिख सुबह घर पर सिर ढककर और सम्मान से बैठकर रोज़ का हुकमनामा पढ़ते या सुनते हैं।

क्या मैं पिछले दिन का हुकमनामा देख सकता हूँ?

हाँ। “पिछला दिन” बटन से एक-एक दिन पीछे जाएँ।

आज का हुकमनामा हिंदी में अर्थ सहित कहाँ पढ़ें?

इसी पेज पर। “अर्थ” के नीचे हिंदी चुनें और आज का हुकमनामा प्रो. साहिब सिंह के हिंदी अर्थ सहित पढ़ें। पंजाबी या अंग्रेज़ी अर्थ भी वहीं मिलते हैं।

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