बच्चों के लिए गुरबाणी

गुरबाणी गुरु की बाणी है, जो श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में लिखी है। यहाँ कुछ ऐसी शुरुआती पंक्तियाँ हैं जो बहुत से सिख बच्चे सबसे पहले सीखते हैं, उनके अर्थ के साथ।

🙏 गुरबाणी का बहुत आदर किया जाता है। बहुत से लोग इसे पढ़ते या इसका पाठ करते समय अपना सिर ढकते हैं।

मूल मंतर

अंग 1

कहाँ से: जपुजी साहिब — श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के सबसे पहले शब्द · रचयिता गुरु नानक देव जी

ੴ ਸਤਿ ਨਾਮੁ ਕਰਤਾ ਪੁਰਖੁ ਨਿਰਭਉ ਨਿਰਵੈਰੁ ਅਕਾਲ ਮੂਰਤਿ ਅਜੂਨੀ ਸੈਭੰ ਗੁਰ ਪ੍ਰਸਾਦਿ ॥

ੴ सति नामु करता पुरखु निरभउ निरवैरु अकाल मूरति अजूनी सैभं गुर प्रसादि ॥

इसे कैसे बोलें: ikOankaar sat naam karataa purakh nirabhau niravair akaal moorat ajoonee saibha(n) gur prasaadh ||

👆 किसी शब्द पर टैप करके उसका अर्थ देखें।

💡 हमारे लिए इसका अर्थ

मूल मंतर हमें बताता है कि ईश्वर कैसा है: ईश्वर एक ही है, जिसका नाम सत्य है। ईश्वर ने सब कुछ बनाया है, वह किसी से नहीं डरता और किसी से वैर नहीं करता, न कभी जन्म लेता है और न कभी मरता है — और गुरु की कृपा से ही हम ईश्वर को जान पाते हैं।

प्रकाशित अनुवाद

अकाल-पुरख एक है, जिसका नाम ‘अस्तित्व वाला’ है जो सृष्टि का रचनहार है, (करता है) जो सभ में व्यापक है, भय से रहित है (निर्भय), वैर से रहित है (निर्वेर), जिसका स्वरूप काल से परे है, (भाव, जिसका शरीर नाश-रहित है), जो यौनियों में नहीं आता, जिसका प्रकाश अपने आप से हुआ है और जो सत्गुरू की कृपा से मिलता है।

आदि सच

अंग 1

कहाँ से: जपुजी साहिब · रचयिता गुरु नानक देव जी

ਆਦਿ ਸਚੁ ਜੁਗਾਦਿ ਸਚੁ ॥

आदि सचु जुगादि सचु ॥

इसे कैसे बोलें: aadh sach jugaadh sach ||

ਹੈ ਭੀ ਸਚੁ ਨਾਨਕ ਹੋਸੀ ਭੀ ਸਚੁ ॥੧॥

है भी सचु नानक होसी भी सचु ॥१॥

इसे कैसे बोलें: hai bhee sach naanak hosee bhee sach ||1||

💡 हमारे लिए इसका अर्थ

ईश्वर बिल्कुल शुरुआत में भी सच था, सारे युगों में सच रहा, अभी भी सच है — और हमेशा सच रहेगा। हमारे आसपास की चीज़ें बदलती रहती हैं, पर ईश्वर कभी नहीं बदलता।

प्रकाशित अनुवाद

अकाल पुरख आरम्भ से ही अस्तित्व वाला है, युगों के आरम्भ से मौजूद है।

हे नानक! इस समय भी मौजूद है और आगे भी अस्तित्व में रहेगा।१।

पवण गुरु

अंग 8

कहाँ से: जपुजी साहिब (अंत का सलोक) · रचयिता गुरु नानक देव जी

ਪਵਣੁ ਗੁਰੂ ਪਾਣੀ ਪਿਤਾ ਮਾਤਾ ਧਰਤਿ ਮਹਤੁ ॥

पवणु गुरू पाणी पिता माता धरति महतु ॥

इसे कैसे बोलें: pavan guroo paanee pitaa maataa dharat mahat ||

💡 हमारे लिए इसका अर्थ

प्रकृति हमारे परिवार जैसी है: हवा एक गुरु जैसी है जो हमें साँस देती है, पानी पिता जैसा है, और धरती एक महान माँ जैसी है जो हमें भोजन देती है। इसलिए हमें प्रकृति की देखभाल करनी चाहिए।

प्रकाशित अनुवाद

प्राण (शरीर में इस प्रकार हैं जैसे) गुरू (जीवों की आत्मा के लिए) है। पानी (सभी जीवों का) पिता है और धरती (सबकी) बड़ी माँ है।

तू ठाकुर

अंग 268

कहाँ से: सुखमनी साहिब · रचयिता गुरु अर्जन देव जी

ਤੂ ਠਾਕੁਰੁ ਤੁਮ ਪਹਿ ਅਰਦਾਸਿ ॥

तू ठाकुरु तुम पहि अरदासि ॥

इसे कैसे बोलें: too Thaakur tum peh aradhaas ||

ਜੀਉ ਪਿੰਡੁ ਸਭੁ ਤੇਰੀ ਰਾਸਿ ॥

जीउ पिंडु सभु तेरी रासि ॥

इसे कैसे बोलें: jeeau pi(n)dd sabh teree raas ||

💡 हमारे लिए इसका अर्थ

हमारा जीवन और हमारा शरीर ईश्वर के दिए हुए उपहार हैं। हम किसी भी समय, किसी भी बात के बारे में प्रार्थना (अरदास) में ईश्वर से बात कर सकते हैं।

प्रकाशित अनुवाद

(हे प्रभू !) तू मालिक है (हम जीवों की) अर्ज तेरे आगे ही है।

ये जिंद और शरीर (जो तूने हमें दिया है) सब तेरी ही कृपा है।

सभ को मीत

अंग 671

कहाँ से: राग धनासरी · रचयिता गुरु अर्जन देव जी

ਸਭੁ ਕੋ ਮੀਤੁ ਹਮ ਆਪਨ ਕੀਨਾ ਹਮ ਸਭਨਾ ਕੇ ਸਾਜਨ ॥

सभु को मीतु हम आपन कीना हम सभना के साजन ॥

इसे कैसे बोलें: sabh ko meet ham aapan keenaa ham sabhanaa ke saajan ||

💡 हमारे लिए इसका अर्थ

मैं सबको अपना दोस्त मानता हूँ, और मैं सबका दोस्त हूँ। एक सिख हर इंसान से प्यार से पेश आता है, चाहे वह कोई भी हो।

प्रकाशित अनुवाद

(हे भाई ! साध-संगति की बरकति से) हरेक प्राणी को मैं अपना मित्र समझता हूँ।मैं भी सबका मित्र-सज्जन ही बना रहता हूँ।

गुरबाणी का पाठ और लिप्यंतरण BaniDB से। अंग्रेज़ी अनुवाद: संत सिंह खालसा। पंजाबी और हिंदी अनुवाद: प्रो. साहिब सिंह (श्री गुरु ग्रंथ साहिब दर्पण)। “हमारे लिए इसका अर्थ” वाले नोट बच्चों के लिए आसान व्याख्याएँ हैं — गहरी समझ के लिए कृपया अपने गुरुद्वारे में पूछें।