गुरुद्वारा और लंगर
गुरुद्वारा (“गुरु का द्वार”) सिखों का पूजा-स्थान है। यह सबके लिए खुला है — सिख हों या न हों, किसी भी धर्म के हों या किसी धर्म को न मानते हों।
गुरुद्वारे को कैसे पहचानें
निशान साहिब ढूँढिए — एक ऊँचा झंडे का खंभा, जिस पर केसरी (नारंगी) या नीले रंग का तिकोना झंडा होता है और उस पर खंडे का चिह्न बना होता है।
दरबार हॉल
यह मुख्य हॉल है, जहाँ श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सिंहासन पर विराजमान होते हैं। लोग साथ मिलकर ज़मीन पर बैठते हैं, कीर्तन (शबद गायन) सुनते हैं और प्रार्थना करते हैं।
अरदास और कड़ाह प्रसाद
दीवान अरदास से पूरा होता है, जो खड़े होकर की जाने वाली प्रार्थना है। फिर सबको आशीर्वाद के रूप में कड़ाह प्रसाद मिलता है — आटे, घी और चीनी से बना मीठा, गरम हलवा।
लंगर — मुफ़्त रसोई
हर गुरुद्वारे में लंगर होता है, जहाँ आने वाले हर व्यक्ति को मुफ़्त शाकाहारी खाना परोसा जाता है। सब लोग पंक्तियों में साथ-साथ ज़मीन पर बैठते हैं, ताकि कोई किसी से ऊँचा न हो।

श्री दरबार साहिब
अमृतसर का हरिमंदिर साहिब, जिसे श्री दरबार साहिब भी कहते हैं (अंग्रेज़ी में “Golden Temple”), दुनिया का सबसे प्रसिद्ध गुरुद्वारा है।
यह एक चमचमाते सरोवर के बीच में बना है, जिसे अमृत सरोवर कहते हैं। महाराजा रणजीत सिंह ने इसकी ऊपरी मंज़िलों पर सोना चढ़वाया।
इसका लंगर धरती की सबसे बड़ी मुफ़्त रसोइयों में से एक है — भीड़ वाले दिन यहाँ लगभग 1,00,000 लोग खाना खाते हैं, और खाना सेवादार (स्वयंसेवक) बनाते और परोसते हैं।
गुरुद्वारे जाना: एक चेकलिस्ट
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