गुरु 9 / 10
गुरु तेग बहादुर जी
- जन्म
- 1621
- गुरु रहे
- 1664–1675
- किस लिए जाने जाते हैं
- धर्म की आज़ादी के रक्षक
कश्मीर के हिंदू पंडितों का एक दल मदद माँगने गुरु तेग बहादुर जी के पास आया। बादशाह औरंगज़ेब लोगों का ज़बरदस्ती धर्म बदलवा रहा था।
गुरु जी उनके हक़ के लिए खड़े होने दिल्ली गए। उन्होंने अपना धर्म बदलने से इनकार कर दिया और 1675 में उन्हें शहीद कर दिया गया। उन्होंने हर इंसान के अपना धर्म चुनने के हक़ के लिए अपने प्राण दिए।
और जानें
उन्हें “हिंद दी चादर” — यानी भारत की ढाल — कहा जाता है। उनके तीन साथी, भाई मती दास, भाई सती दास और भाई दयाला, भी शहीद हुए। दिल्ली में जहाँ वे शहीद हुए, वहाँ गुरुद्वारा सीस गंज साहिब है। इससे पहले उन्होंने आनंदपुर साहिब नगर बसाया था। उनकी बाणी श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में दर्ज है।