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गुरु 2 / 10

गुरु अंगद देव जी

जन्म
1504
गुरु रहे
1539–1552
किस लिए जाने जाते हैं
गुरमुखी लिपि, सेहतमंद शरीर और लंगर

गुरु अंगद देव जी ने गुरमुखी लिपि को लोकप्रिय बनाया, ताकि आम लोग भी गुरुओं की बाणी पढ़-लिख सकें।

उन्होंने बच्चों के लिए स्कूल खोले और उन्हें कुश्ती देखना बहुत पसंद था — वे मानते थे कि सेहतमंद शरीर से मन भी सेहतमंद रहता है।

और जानें

गुरु बनने से पहले उनका नाम भाई लहणा था। उन्होंने पूरे मन से गुरु नानक जी की सेवा की। उनकी पत्नी, माता खीवी जी, लंगर (मुफ़्त रसोई) चलाती थीं। वे अकेली स्त्री हैं जिनका नाम उनकी सेवा के लिए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में आता है।

📍 नक्शे पर देखने लायक जगहें